र्नाटक के कुमकी हाथी संभालेंगे छत्तीसगढ़ के घुमंतू हाथियों को-गागड़ा

रायपुर, 07 फरवरी (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन आज कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव, विधायक अमरजीत भगत एवं डॉ. प्रीतम राम ने ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान हाथियों का आतंक एवं जन-धन की हानि की घटनाओं पर शासन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विगत कुछ वर्षों में कतिपय कारणों से हाथी अपने प्राकृतिक आवास को छोड़कर आबादी क्षेत्रों में घुस रहे हैं, जिसके कारण आये दिन मानव व हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाएं आतंक का रूप ले चुकी है। ग्राम पंचायत बकोई के ग्राम खुज्जी में 5-6 घरों को हाथियों ने तोड़ दिया तथा फसलों को जमकर नुकसान पहुंचाया। हाथियों के हमले में से ग्रामीणजन दहशतजदा है। हाथियों के आतंक से थर्राये ग्रामीणों ने अस्थायी कैंपों में पनाह ली है। हाथी आये दिन किसानों की फसलें व मकान, बाड़ी, खलिहान इत्यादि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी चिंताजनक हो गई है। प्रदेश में कुल 17 जिले हाथी के उत्पात से प्रभावित है। उक्त जिलों में विगत 5 वर्षों में कुल 199 व्यक्तियों की मृत्यु हाथी के हमले से हुई तथा कुल 7000 घरों का नुकसान हुआ है। 32952.891 हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ है। जनवरी 2017 से 30 नवंबर 2017 की स्थिति में बिलासपुर संभाग अंतर्गत राज्य सरकार जंगली हाथियों के आक्रमण से हो रही जनहानियों, मकान, फसल एवं अन्य परिसम्पतियों के नुकसान को रोक पाने में पूर्णत: असफल रही है। हाथियों के आक्रमण को रोकने के लिये राज्य द्वारा कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं करने के कारण प्रभावित लोगों सहित प्रदेशवासियों में भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में वन मंत्री महेश गागड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा देश के अन्य हाथी बाहुल्य राज्यों के प्रबंधन के अनुरूप रणनीतियों को क्रियान्वयन किया जा रहा है। कर्नाटक राज्य से 5 कुमकी हाथियों को छत्तीसगढ़ लाया गया। वर्तमान में कुमकी हाथियों को महासमुंद वनमंडल के उपयुक्त वन क्षेत्र में क्वारनटाइ्रन कैम्प में रखा गया है। इन कुमकी हाथियों की मदद से हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जंगली हाथियों को रोडियो कॉलर करके, उनके विचरण की गतिविधि को ज्ञात कर, प्रभावी सतर्कता लाकर क्षेत्र में जनहानि रोकने के समग्र प्रयास किये जायेंगे।

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