चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के मुद्दे को शामिल करें राजनीतिक दल

नई दिल्ली ,14 मार्च (आनएनएस)। किसान आंदोलन की अखिल भारतीय समन्वय समिति जिसमें भारत के सभी प्रमुख किसान संगठन जैसे कि भारतीय किसान यूनियन, कर्नाटक राज्य रायता संघ, तमिलगा विवासैयागल संघ, आदिवासी गोत्र महासभा और दक्षिण भारत के कई किसान संगठन शामिल है, ने मिलकर एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की और अपनी 18 सूत्रीय मांगों को सभी राजनैतिक दलों के घोषणापत्र में शामिल करने और तय समयसीमा में उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की है।
किसानों की मांगे इस प्रकार हैं-
1. डॉ स्वामीनाथन समिति द्वारा सुझाए गए सी 2 फार्मूला का उपयोग करते हुए सभी कृषि उत्पादों जैसे कि फल, सब्जी और दूध के दाम तय करते वक्त उत्पादन की लागत में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
2. सभी किसानों जिनमें काश्तकार किसान भी शामिल है के सभी लोन को बिना किसी शर्त के माफ किया जाए। किसानों के लभभग 80 प्रतिशत ऋण राष्ट्रीयकृत बैंको से हैं।सत्ता में आने के छह माह के भीतर सभी प्रकार के लोन ( राष्ट्रीयकृत बैंक-सहकारी बैंक) को माफ किया जाए।
3. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों की बजाय बीमा कंपनियों को मिल रहा है। इस योजना में परिवर्तन करते हुए प्रत्येक किसान को एक यूनिट की तरह माना जाए।साथ ही इस योजना में जानवरों एवं आग द्वारा खेती को होने वाले नुकसान को भी शामिल किया जाए। पूरा प्रीमियम सरकार द्वारा दिया जाए। फसल नुकसान के मामलों में बीमित राशि कम से कम उत्पाद के खर्च के बराबर तो हो ही और संभावित उत्पाद को आधार बनाया जाए नाकि पूर्व के उत्पाद को।
4.किसानों के लिए न्यूनतम आय सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रति किसान प्रति वर्ष प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की अतिरिक्त आय सहायता देश की सभी किसानों को दी जाए। छोटे और मझौले किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद प्रति माह कम से कम 5 हजार रूपए प्रति माह पेंशन दी जाए।
5. जंगली और आवारा जानवर जैसे कि जंगली सूअर और मवेशी किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं। इससे खाद्य सुरक्षा और खेती दोनों को खतरा है।प्रांतीय आधार पर इससे सुरक्षा हेतु एक विस्तृत कार्य योजना बनाई जानी चाहिए
गन्ना किसानों के सभी लम्बित भुगतान ब्याज सहित तत्काल बिना किसी बिलंब के किए जाएं। गन्ने का मूल्य कम से कम 40 रूपए प्रति किलो तय किया जाए।
7. ट्यूब वेल के माध्यम से सिंचाई हेतु सभी किसानों को मुफ्त बिजली मुहैया कराई जाए।
8. अधिकारिक रिकार्ड के अनुसार, पिछले दस वर्षों में, तीन हजार किसानों ने आत्महत्या की है। यह पूरे देश के लिए बेहद शर्म का विषय है। यह आत्महत्या बदस्तूर जारी है।जिन किसानों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को पुनर्वासित किया जाए और उनके परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी अवश्य दी जाए।
9. सांप के काटने, काम के दौरान होने वाली दुर्घटना से अपनी जान खो देने वाले किसानों के लिए एक विशिष्ट सामाजिक सुरक्षा योजना बना लागू की जानी चाहिए।
10. मनरेगा को कृषि के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
11. सभी आदिवासियों, वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों जोकि उनके मूल मालिक है और जंगल और पहाड़ पर अपने जीवन और संस्कृति के लिए निर्भर हैं उनकी आजीविका की रक्षा करते हुए उन्हें वहां से हटाया जा जाए चाहें वन अधिकार कानून में उनका दावा निरस्त ही क्यों ना हो गया हो।
12. कृषि कार्यों में उपयोग में आने वाले सभी औजारों को जी एस टी से मुक्त किया जाए।
13. कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखा जाए। मुक्त व्यापार समझौतों जिसमें की वर्तमान में चल रहे आर सी ई पी सौदा भी शामिल है, में कृषि पर कोई समझौता ना किया जाए। किसी भी व्यापार समझौते में किसानों के हितों का सौदा न किया जाए। केंद्र सरकार इस तरह का कानून लाए जिसमें मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा संसद के दोनों सदनों में करना आवशयक किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा इस पर हस्ताक्षर करने से पहले राज्य विधान सभाओं से भी इसे पारित किया जाए।
14 . भारत द्वारा अब तक हस्ताक्षरित सभी मुक्त व्यापार समझौतों पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए।
15. कृषि उत्पाद का आयात जिसे देश में लाकर डंप किया जा रहा है, उसे तत्काल बंद किया जाए। एशियन मुक्त व्यापार समझौते के अन्तर्गत, कुछ देश ऐसे उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं जोकि उनके यहां पैदा ही नहीं होता। यह समझौते का खुला उल्लंघन है। इस प्रक्रिया को तत्काल प्रतिबंधित करना चाहिए।
16. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास कानून 2013 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार को सभी राज्यों में क्रियान्वित किया जाना चाहिए। भूमि अधिग्रहण की राज्य की बजाय केंद्र का विषय बनाया जाना चाहिए।
17. कृषि मुद्दों पर संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जाना चाहिए। जिसमें बढ़ते कृषि संकट और दिन प्रतिदिन छोटे और मझौले किसानों द्वारा कृषि छोड़ कर मजदूर बनने और शहरों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होने पर चर्चा ही कृषि संकट पर चर्चा के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाए।
18. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने एन सी आर क्षेत्र में 10वर्षों से पुराने डीजल वाहनों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और कृषि में प्रयोग में लाए जाने वाले डीजल इंजन को इस प्रतिबंध से मुक्त किया जाना चाहिए।
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