(महत्वपूर्ण)(नईदिल्ली)विपक्षी नेताओं ने की राष्ट्रपति से मुलाकात

0-नागरिकता संशोधन कानून का हिंसक विरोध
नई दिल्ली,16 दिसंबर (आरएनएस)। देशभर में नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया और उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हिंसक प्रदर्शन का मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत इसपर कल सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की।
इस संशोधित कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन और हिंसा के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार करार देते हुए विपक्ष ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घेरते हुए इस कानून में संशोधन करके देश में विद्रोह के हालात बनाने का आरोप लगाया। विपक्षी दलों ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता की जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हिंसा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान पर टिप्पणी की जिसमें उन्होंने हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताया था पर कहा कि यदि कांग्रेस के पास इतनी ताकत होती तो आप सत्ता में नहीं होतो। बिना अनुमति के पुलिस कॉलेज में कैसे घुस गई। आजाद ने कहा कि सत्ता पक्ष कांग्रेस पर देशभर में प्रदर्शन करवाने का आरोप लगा रहा है। उन्होने कि अगर कांग्रेस की इतनी ताकत होती कि इतना बड़ा विद्रोह करा सकते तो आप सत्ता में नहीं होते। आजाद ने कहा कि प्रदर्शनों में हर धर्म के बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस वक्त देशभर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसा कोई राज्य नहीं बचा जहां विरोध न हो रहा हो। आजाद ने कहा, पुलिस कैंपस में घुसी, लाइब्रेरी में जाकर, बाथरूम में जाकर छात्रों को पीटा। अंधेरे में वहां छात्र फंस गए थे। लड़कियां बचाओ, बचाओ चिल्ला रही थीं। इस दौरान आजाद के अलावा सीपीआई के सीताराम येचुरी व डी राजा, सपा के प्रो. रामगोपाल यादव आदि नेता मौजूद थे। विपक्ष ने जामिया यूनिवर्सिटी हिंसा के मामले में न्यायिक जांच की मांग की है और राष्ट्रपति से मुलाकात करने का भी निर्णय लिया।
संसद के आपातकालीन सत्र को बुलाया जाए
नागरिकता कानून को लेकर समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि उनकी मांग है कि संसद का आपातकालीन सत्र बुलाया जाए। नागरकिता कानून में संशोधन किया जाए ताकि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो सके या फिर इस अधिनियम को निरस्त किया जाए।
हिंसा में स्थानीय लोग शामिल छात्र नहीं
जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने कहा है कि हम देशभर में हो रहे प्रदर्शन की बात नहीं करते। हमारे बच्चे सुरक्षित रहें हमारा कैंपस सुरक्षित रहे ये हम चाहते हैं। हिंसा में स्थानीय लोग शामिल हैं छात्र नहीं। वीसी का आरोप है कि बिना पूछे पुलिस कैंपस में घुस गई और हमारे बच्चों के साथ बर्बरता की और उन्हें डराया गया।
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मांगी रिपोर्ट
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने जामिया विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों और छात्रों से जानकारी मांगी है।
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