भारतीय संस्कृति में कला परमात्मा से जुडऩे का साधन: प्रहलाद सिंह पटेल

नईदिल्ली,05 अगस्त (आरएनएस)। सोमवार को नई दिल्ली में रबीन्द्र भवन परिसर स्थित आर्ट गैलरीज़ में देश की राष्ट्रीय कला संस्था, ललित कला अकादेमी का 65वां स्थापना दिवस मनाया गया. समारोह का उद्घाटन संस्कृति राज्य मंत्री, भारत सरकार, प्रह्लाद सिंह पटेल ने किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि भारत सरकार के राज्य संस्कृति व पर्यटन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद सिंह पटेल ने अकादेमी को बधाई और शुभकामनाएं दीं और कहा, यह अवसर गत 64 वर्षों में अकादेमी द्वारा अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर रहने ओर उसमें उसके प्रदर्शन के अवलोकन व मूल्यांकन का भी एक महत्वपूर्ण क्षण है। भारत सरकारओर संस्कृति मंत्रालय आधुनिक और समकालीन भारतीय कला के साथ प्राचीन कलाओं के प्रचार-प्रसार के अकादमी के प्रयत्नों की सराहना करती है। कला को एक निरंतर चलने वाली साधना बताते हुए उन्होंने कहा, साधना का मार्ग ईश्वर को पाने का मार्ग है, मीरा ने गा कर, तो तुलसी ने लिख कर ईश्वर को प्राप्त किया और कलाकार कृतियाँ सृजित करके करता है. अत: आप मान कर चलिए की इस मार्ग में सकारात्मकता होगी, परिश्रम होगा और जिज्ञासा होगी. तो मेरा यह मानना है कि अकादमी का कला को ले के जो उद्देश्य है उसकी पूर्ति के लिए हम सबको साथ मिलकर चलना होगा. उन्होंने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के कल्चरल मैपिंग प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया।
किसी भी राष्ट्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर एवं विचारों को आने वाली पीढिय़ों तक पहुंचाने का दायित्व कला का होता है और यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अपने आरम्भ से लेकर आज 64 वर्ष के लम्बे सफऱ में अकादेमी ने अपनी इस जि़म्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयत्न किया है और उसमें सफल भी रही है।
2019 में महात्मा गाँधी के 150वें जन्मदिवस वर्ष के उपलक्ष्य में भारत सरकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पूरे वर्ष चलने वाली परंपरा को जारी रखते हुए अकादेमी के स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत महात्मा गांधी पर भजन प्रस्तुति की साथ की गयी। इसके पश्चात् अकादमी के अध्यक्ष उत्तम पाचारणे ने पुष्पगुच्छों और शॉल से मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया. इस मौके पर अकादेमी के जनरल काउंसिल के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि व संस्कार-भारती के संस्थापक पद्मबाबा योगेन्द्र ने कहा, भारत की कला व सांस्कृतिक विरासत सदियों पुरानी है और मुझे ख़ुशी है कि अकादमी इस विरासत को सहेजने का भरसक प्रयास कर रही है. उन्होंने इस मौके पर प्रागैतिहासिक भारतीय कला के संयोजन में प्रो. वी. एस. वाकणकर के अविस्मरनीय योगदान को भी याद किया।
अकादमी के 64 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर आभार व प्रसन्नता जताते हुए उत्तम पाचारणे, अध्यक्ष ललित कला अकादेमी, ने अकादमी के सफऱ को याद किया और संस्थान कर्मियों, स्टाफ, कलाकारों एवं कला जगत की तमाम् शख्सियतों को इस बड़े अवसर पर बधाई दी और बताया कि अकादमी का 65वां वर्ष महिला कलाकारों को समर्पित रहेगा। इसके अतिरिक्त आगामी वर्ष में त्रिवार्षिकी भारत और प्रिंट बिनाले जैसे आयोजनों का जि़क्र करते हुए उन्होंने कहा, अकादमी प्रयत्न कर रही है कि त्रिनाले इंडिया और प्रिंट बिनाले जल्द ही आयोजित कराये जायेंगे. साथ ही अकादमी का प्रयास रहेगा कि लोक व जन-जातीय कला का भी एक त्रिनाले इन आयोजनों के सामानांतर ही शुरू कर सकें जिससे भारत की लोक परंपरा और कला बड़े प्लेटफार्म से दुनिया तक पहुंच सके।
विशिष्ट अतिथि व इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए कहा, कोई भी कला तब तक फलीभूत नहीं होती जब तक वह स्वयं को समाज के सापेक्ष नहीं बनाती और यह हार्दिक प्रसन्नता की बात है कि अकादेमी में इस तरह के उपक्रम हो रहे हैं जो अपने आप को समय के सापेक्ष बना रहे हैं।
राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष तरुण विजय और राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के महानिदेशक अद्वैत गणनायक की भी समारोह में सम्उपस्थिति रही।
इस अवसर पर प्रसिद्ध कलाकारों वासुदेव कामत और रवीन्द्र साल्वे द्वारा लाइव पेंटिंग डेमोनस्ट्रेशन दिया गया और अवधेश अमन द्वारा लिखित पुस्तक ‘मिथिला की लोक चित्रकलाÓ का भी लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकार, कला समीक्षक, कला विद्यार्थी और आम जन मौजूद रहे।
65वें स्थापना दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है जिसमें राष्ट्रीय महिला कलाकार शिविर और अकादेमी के संकलन से महिला कलाकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी शामिल हैं।महिला कलाकार शिविर में सोनल वार्ष्णेय, गौरी वेमूला, सुजाता आचरेकर और डॉ. नीता योगेन्द्र पहाडिय़ा समेत 12 कलाकार भाग ले रही हैं। प्रसिद्ध कलाकार रवीन्द्र साल्वे इस कार्यकम का संचालन कर रहे हैं. अकादेमी के संकलन से विख्यात कलाकारों अर्पिता सिंह, गोगी सरोज पाल, माधवी पारेख और जऱीना हाशमी व अन्य वरिष्ठ महिला कलाकारों की कृतियाँ प्रदशित की गयी हैं।
इसके अतिरिक्त भारतीय सशत्त्र बलों को समर्पित पोस्ट-कार्डों की भी एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी द्वारा किया गया है। 500 से अधिक पोस्ट-कार्ड्स की इस अनोखी प्रदर्शनी का क्युरेशन उत्तर प्रदेश के कलाकार- समीक्षक भूपेन्द्र कुमार अस्थाना और उनके एन.जी.ओ. सप्रेम फाउंडेशन द्वारा किया गया है।
रबीन्द्र भवन स्थित ललित कला दीर्घा में आयोजित ये प्रदर्शनियां दर्शकों और कला प्रेमियों के अवलोकनार्थ सोमवार, 12 अगस्त तक प्रात: 11 से शाम 7 बजे तक रोज़ाना खुली रहेंगी।
००

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »