औषधीय क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत और अमरीका के बीच अंतर-संस्थागत समझौते को मिली मंजूरी

नईदिल्ली,17 जुलाई (आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नया जीवन प्रदान करने वाली औषधि और 3डी बायोप्रिंटिंग, नई प्रौद्योगिकियों, वैज्ञानिक विचारों/सूचनाओं और प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदानतथा वैज्ञानिक अवसंरचना के संयुक्त इस्तेमाल के क्षेत्रों में भारत और अमरीका के बीच अंतर-संस्थागत समझौते को पूर्वव्यापी मंजूरी दे दी है।
इस समझौते के अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सम्मेलन, सेमिनार आदि सभी योग्य वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों के लिए खुले रहेंगे और वैज्ञानिक योग्यता और उत्कृष्टता के आधार पर उन्हें सहयोग दिया जाएगा। नया जीवन प्रदान करने वाली औषधि और 3डी बायोप्रिटिंग के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास में नई बौद्धिक संपदा, कार्यविधि, प्रोटोटाइप अथवा उत्पादों को उत्पन्न करने की संभावना है।
दोनों संस्थानों का अनुमान है कि समझौते के अंतर्गत किये गये सामान्य शैक्षणिक आदान-प्रदान से कुछ विशेष परियोजनाओं का विस्तार होगा, जिनमें से प्रत्येक के शैक्षणिक, क्लीनिकल और व्यावसायिक प्रभाव हो सकते है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में आपसी लाभ के लिए भारत सरकार और अमरीका के बीच मजबूत और दीर्घकालिक सहयोग को सरकार द्वारा महत्व देने के समान, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान चित्र तिरूनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेस एंड टैक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी), तिरूवनंतपुरम और अमरीका स्थित उत्तरी कैरोलिना के इंस्टीट्यूट फॉर रिजनरेटिव मेडिसिन (डब्ल्यूएफआईआरएम) की ओर से वेक फोरेस्ट यूनिवर्सिटी हैल्थ साइंसेस के बीच शैक्षणिक सहयोग का एक समझौता हुआ। इस समझौते पर चित्र तिरूनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेस एंड टैक्नोलॉजी, तिरूवनंतपुरमकी ओर से वहां की निदेशक प्रोफेसर आशा किशोर और वेक फोरेस्ट यूनिवर्सिटी हैल्थ साइंसेस की ओर से मुख्य विज्ञान अधिकारी और अनुसंधान प्रशासन के वरिष्ठ एसोसिएट डीन ग्रेगरी बुर्के और इंस्टीट्यूट फॉर रिजनरेटिव मेडिसिन के निदेशक प्रोफेसर एंथनी अटाला ने 13 दिसम्बर, 2018 को हस्ताक्षर किये।
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