विश्व में योग भारत और भारतीयता की पहचान:सरोज पांडेय

नयी दिल्ली ,02 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ से बीजेपी की राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौराण योग को अनिवार्य शिक्षा के रूप में शामिल करने हेतू प्रस्ताव रखा। सरोज पांडेय ने कहा कि योग को स्कूल में अनिवार्य करना पूरे विश्व में योग भारत और भारतीयता की पहचान है । सरोज पांडेय ने कहा कि यह हमारे पूर्वजो के द्वारा दिया गया वह ज्ञान है जो बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के अपने तन और मन को स्वस्थ संतुलित तथा सशक्त बनाये रखता है। आज योग की अनिवार्यता हर व्यक्ति के जीवन में इसीलिए भी है बढ़ गयी है। क्योंकि वर्तमान आधुनिक जीवन पूर्व की अपेक्षा अधिक अनियमित,संघर्षपूर्ण तथा कठिन हो गया है । आज के खान पान और प्रदूषण के प्रभावित जलवायु मनुष्य के शरीर में लगतार विपरीत प्रभाव डालते रहता है। आज दौर में लोगो को आतिरिक्त बल की आवश्यकता है ताकि जीवनचर्या में होने वाले विपरीत प्रभावों को खत्म किये जा सके। योग हमें यही अतिरिक्त बल प्रदान करता है। स्वायु तंत्रों से लेकर खास प्रणाली तक को स्वस्थबनाये रखने का कार्य हमारेपूर्वजो द्वारा बताये गये योगासन करते है। भारत की इस धरोहर की महत्व को अंतराष्ट्रीय समुदाय ने भी माना है और आज पूरा विश्व 21 जनू को योग दिवस के रूप में मनाता है । अगर हम अपने नैनिहालो की बात करे तो वर्तमान का प्रदूषित वातावरण,अनियमित खान पान, दवावपूर्ण दिनचर्या सबसे अधिक उनपर ही विपरीत प्रभाव डालता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। वह स्वयं भी इतना परिपक्क नही होते है कि अपने शरीर पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को जान सके । अत: यह आवश्यक है कि बाल्यकाल से ही स्कूलों में उन्हें अनिवार्य रूप योग की शिक्षादी जाये और इसे उनके पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाये। जब उनके जीवन के शुरूआती वर्षों में ही योग को दैनिक दिनचर्या का एक अंग बना दिया जयेगा तो यह जीवन पर्चन्त उनके दिनचर्या में शामिल रहेगा। इससे ना उनके शरीर की मजबूती हमेशा बनी रहेगी जिससे वह बीमार नही होगे बल्कि मन भी सात्विक बना रहेगा ।
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