यूपी में बुजुर्ग नेताओं के पर नहीं कतरेगी भाजपा

नई दिल्ली,25 जनवरी (आरएनएस)। इसे 5 राज्यों के हालिया विधानसभा चुनाव मेंं लगा झटका माने या कुछ और, मगर भाजपा नेतृत्व पार्टी में 75 वर्ष की उम्र सीमा पार कर चुके ज्यादातर नेताओं को लोकसभा टिकट से वंचित नहीं करेगी। खासतौर में उत्तर प्रदेश में बड़ी चुनौतियों से जूझ रही पार्टी अपने दोनों वयोवृद्घ नेताओं डॉ मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र को चुनाव मैदान में उतारेगी। इसकेअलावा नेतृत्व ने लालकृष्ण आडवाणी, सुमित्रा महाजन, हुकुमदेव नारायण यादव और शांता कुमार को चुनाव लड़ाने के फैसला उनके विवेक पर छोड़ दिया है। गौरतलब है कि इनमें से ज्यादातर नेताओं को पार्टी ने सरकार में जगह नहीं दी थी, जबकि 75 की उम्रसीमा पार करने वाले कलराज को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक खासतौर से यूपी जहां ब्राह्मïण मतदाताओंं का व्यापक असर है, वहां पार्टी किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहती। यही कारण है कि नेतृत्व ने देवरिया और कानपुर के सांसद कलराज और जोशी को दोबारा चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है। दोनों नेता फिर से चुनाव मैदान में उतरने केइच्छुक भी हैं। गौरतलब है कि इस सूबे में पार्टी सपा-बसपा गठबंधन के बाद गांधी परिवार की अहम सदस्य प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद अगड़े वोट बैंक को ले कर पहले से भी ज्यादा सतर्क हो गई है। हालांकि सूत्र ने साफ किया कि इनके चुनाव जीतने केबावजूद पार्टी 75 वर्ष की उम्रसीमा पार कर चुकेनेताओं को सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं देने की नीति पर कायम रहेगी।
आडवाणी ने नहीं लिया है फैसला
पार्टी ेक सबसे वरिष्ठï नेता और वर्तमान में गांधीनगर के सांसद लालकृष्ण आडवाणी चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह फैसला उन्हीं पर छोड़ दिया गया है। हालांकि आडवाणी ने अब तक नेतृत्व की अपनी इच्छा से अवगत नहीं कराया है। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा और शांता कुमार को भी खुद फैसला लेना है। हालांकि इसी कड़ी में उत्तराखंड के पूर्व सीएम बीएस खंडूरी को उनकी पुत्री के सक्रिय राजनीति में शिरकत होने और खराब स्वास्थ्य के कारण चुनाव मैदान में नहीं उतरा जाएगा। जबकि बेहतर रणनीति के लिए येदियुरप्पा और हुकुमदेव नारायण यादव को पार्टी चुनाव लड़ाएगी।
सुषमा को लडऩा पड़ सकता है चुनाव
स्वास्थ्य कारणों से विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव न लडऩे की घोषणा करने वाले सुषमा स्वराज को चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है। एक शीर्ष नेता के मुताबिक भले ही सुषमा ने खुद चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा की है, मगर यह पार्टी का फैसला नहीं था। अब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मध्यप्रदेश की स्थिति की समीक्षा होगी। अगर जरूत महसूस हुई तो सुषमा को चुनाव लडऩे के लिए कहा जाएगा।
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